History & Generation : generation of computer , history and generation of computer, generation of computer 1st to 5th, basic computer knowledge

कंप्यूटर से परिचय-
कंप्यूटर एक मशीन है जो कि हर इंसान के जीवन के लगभग सभी क्षेत्रों में इस्तेमाल किया जा रहा है । वेब प्रौद्योगिकी , इंटरनेट और मोबाइल फोन की क्रांति ने ज्ञान के नए आयाम स्थापित किये है और एक नयी विचार प्रक्रिया को जीवन दिया है । कंप्यूटर पर सतत अनुसंधान एवं विकास की गति के साथ हम यह कह सकते हैं कि यह हमें जीवन में नए नए अनुभवों से अवगत करवाता रहेगा ।
*पर्सनल कंप्यूटर गणना , डिजाइन और प्रकाशन प्रयोजनों के लिए छात्रों , इंजीनियरों , रचनात्मक लेखकों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है । कंप्यूटर ने सीखने की प्रक्रिया को भी बढ़ाया है । विद्यार्थी कक्षा में ही नहीं बल्कि जब वह यात्रा कर रहा है , या पीसी ( पर्सनल कंप्यूटर ) के साथ घर पर बैठ कर भी पढ़ सकते हैं । इंटरनेट प्रौद्योगिकी से हर व्यक्ति के दरवाजे पर सभी जानकारी लाना संभव हुआ है । लोग अब पूछताछ , बैंकिंग , शॉपिंग और कई और अधिक अनुप्रयोगों के लिए कंप्यूटर का उपयोग कर रहे हैं । अब हम सूचना सुपर हाइवे के एक युग से गुजर रहे हैं जहां सभी प्रकार की जानकारी सिर्फ कंप्यूटर का एक बटन पर क्लिक करके उपलब्ध की जा सकती है ।

Computer की पीढ़िया ( Generation )-हम कंप्यूटर पीढ़ियों को पांच मुख्य अवधियों में विभाजित कर सकते है | हर पीढ़ी के कंप्यूटरों को उनके द्वारा उपयोग में ली जाने वाली तकनीक के आधार पर परिभाषित किया गया है । समय के गुजरने के साथ - साथ नए प्रौद्योगिकीय नवाचारों ने जगह ली है और हर बड़ती पीढी के साथ कंप्यूटर की दक्षता में वृद्धि हुई है तथा प्रसंस्करण की लागत में कमी आई है ।

1st generation  : प्रथमपीढ़ी ( 1942 - 1956 )-

  • पहली पीढ़ी के कंप्यूटर में मुख्य इलेक्ट्रॉनिक घटक के रूप में वैक्यूम ट्यूबों एवं डेटा भंडारण के लिए चुंबकीय ड्रम का इस्तेमाल किया गया । उनका आकार काफी बड़ा था ; यहां तक कि उन्हें रखने के लिए एक पूर्ण कक्ष की आवश्यकता होती थी ।
  • वे बहुत महंगे थे , गर्मी का उत्सर्जन अत्यधिक था , जिसकी वजह से उन्हें ठंडा करनाबहुत आवश्यक होता था और साथ ही उनका रखरखाव भी बहुत कठिन काम था ।
  • पहली पीढ़ी के कंप्यूटर को ऑपरेट करने के लिए मशीन भाषा का इस्तेमाल इसकी प्रोग्रामिंग भाषा के रूप में किया जाता था ।
  • पहली पीढ़ी के कंप्यूटर को इनपुट पच्ड कार्ड और कागज टेप द्वारा दिया जाता था ।
  • पहली पीढ़ी के कंप्यूटर एक समय में एक ही समस्या को हल करने में सक्षम थे ।

2nd generation : दूसरी पीढ़ी ( 1956 - 1965 )-

  • दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर में इलेक्ट्रॉनिक घटक के रूप में ट्रांजिस्टर का इस्तेमाल किया गया था ।
  • ट्रांजिस्टर कुशल , तेज , कम बिजली की खपत और पहली पीढ़ी के कंप्यूटर की तुलना में अधिक सस्ते और विश्वसनीय थे ।
  • हालांकि वे अत्यधिक गर्मी का उत्पादन किया करते थे , लेकिन और अधिक विश्वसनीय भी थे ।
  • इस पीढ़ी में , चुंबकीय कोर प्राईमरी मेमोरी और चुंबकीय टेप एवं चुंबकीय डिस्क सेकण्डरी भंडारण ( स्टोरेज ) उपकरणों के रूप में इस्तेमाल किया गया था ।
  • कोबोल और फोरट्रान के रूप में उच्च स्तरीय कंप्यूटर प्रोग्रामिंग भाषाएँ इस पीढ़ी में शुरू कि गई थी ।



3rd generation : तीसरी पीढ़ी ( 1965 - 1975 ) -

  • तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर में ट्रांजिस्टर के स्थान पर इंटीग्रेटेड सर्किट ( आई . सी . ) का इस्तेमाल किया गया था |
  • एक एकल आईसी ट्रांजिस्टर , प्रतिरोधों और कैपेसिटर की एक बड़ी संख्या को एक साथ संगठित कर के रख सकता है जिसके कारण कंप्यूटर के आकार को और अधिक छोटा बनाया जा सकता था । इस पीढ़ी के कंप्यूटरों द्वारा इनपुट आउटपुट के लिए कीबोर्ड और मॉनिटर का इस्तेमाल किया गया था ।
  • ऑपरेटिंग सिस्टम की अवधारणा को भी ईसी समय पेश किया गया था ।
  • इस पीढ़ी में , समय साझा ( टाइम शेयरिंग ) और बह प्रोग्रामिंग ऑपरेटिंग सिस्टम ( मल्टी प्रोग्रामिंग ऑपरेटिंग सिस्टम ) की अवधारणा को पेश किया गया था ।
  • कई नई उच्च स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषाओं की शुरुआत इस पीढ़ी में हुई , जैसे - फोरट्रान , IV , पास्कल , बेसिक इत्यादि ।



4th generation  : चतुर्थ पीढ़ी ( 1975 - 1988 )-

  • इस पीढ़ी में माइक्रोप्रोसेसर की शुरुआत हुई जिनमे हजारों आईसी एक एकल चिप एक सिलिकॉन चिप पर निर्मित की जा सकती थी ।
  • इस पीढ़ी के कंप्यूटर बहुत बड़े पैमाने पर एकीकृत सर्किट ( वीएलएसआई ) तकनीक का इस्तेमाल किया करते थे ।
  • वर्ष 1971 में इंटेल 4004 चिप विकसित किया गया था , इसमें एक एकल चिप पर एक कंप्यूटर के सभी घटक ( कंपोनेंट ) स्थित होते थे ।
  • -इस प्रयोग की वज़ह से छोटे आकार के कंप्यूटर ने जन्म लिया जिसे डेस्कटॉप कंप्यूटर या पर्सनल कंप्यूटर का नाम दिया गया ।
  • इस पीढ़ी में , समय के बंटवारे ( टाइम शेयरिंग ) की अवधारणा , वास्तविक समय प्रसंस्करण ( रियल टाइम प्रोसेसिंग ) , डिस्ट्रिब्यूटेड ऑपरेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया गया था और साथ ही नयी उच्च स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषाओं जैसे C , C + , डेटाबेस को इस पीढ़ी में इस्तेमाल किया गया था ।


5th generation : पंचमपीढ़ी ( 1988 से अब तक ) -

  • पांचवीं पीढ़ी के रूप में , एक नई तकनीक उभर कर आई जिसे ULSI ( अल्ट्रा लार्ज स्केल इंटीग्रेशन ) कहा जाता है , जिसके अंतर्गत माइक्रोप्रोसेसर चिप में 10 लाख तक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों तक शामिल किया जा सकता था ।
  • इस पीढ़ी में कृत्रिम बुद्धि ( आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस ) की अवधारणा , वोइस रिकग्निशन , मोबाईल संचार , सेटेलाई संचार , सिग्नल डाटा प्रोसोसिंग को आरम्भ किया गया ।
  • उच्च स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषाओं जैसे JAVA , VB और . NET की शुरुआत इस पीढ़ी में  हुई।
  • -कंप्यूटर मशीनों के विकास के क्षेत्र में प्रगति के कारण कंप्यूटर व्यापक व उपयोगी हो गया है और हमारे जीवन के सभी क्षेत्रों में इस्तेमाल किया जा रहा है ।
  • नियमित रूप से चल रहे अनुसंधान और विकास के साथ यह निश्चित है की हम समय गुजरने के साथ में नए नए नवाचारो का अनुभव करते रहेंगे ।


इलेक्ट्रानिक्स मशीनों का विकास (History of electronics devices) -अबैकस जो की 5000 साल पहले उभर के आया था उसे पहले कंप्यूटर के रूप में माना जा सकता है । इस डिवाइस में रैक पर स्लाइडिंग बीड्स मोती को उपर नीचे करने की प्रकिया ) का प्रयोग करके बेसिक गणना की जा सकती थी , लेकिन कागज और पेंसिल के अधिक प्रसार और उपयोग में आने के कारण धीरे धीरे अबेकस का महत्व ख़त्म हो गया , अगला कंप्यूटिंग डिवाइस जो की तकनीकी द्रष्टि से बेहतर था , निर्माण में लगभग 12 शताब्दियों का समय लग गया । वर्ष 1642 , ब्लेस पास्कल ने एक संख्यात्मक पहिया कैलकुलेटर का आविष्कार किया । यह पीतल आयताकार बॉक्स आठ चल नंबर डायल करके आठ अंकोतक की संख्याओं को जोड़ने का काम करती थी । उन्होंने इस मशीन का नाम पस्कालिन दिया था ।
--वर्ष 1646 में , एक जर्मन गणितज्ञ , गोत्क्रिएद विल्हेम वॉन लाइबनिट्स ( Gotried Wilhem Von Leibriz ) ने पस्कालिन मशीन में सुधार करते हुए एक मशीन बनाई जो की गुणा भी कर सकती थी . लाइबनिट्स मैकेनिकल गुणक गियर और डायल की एक प्रणाली द्वारा काम करता था । इस मशीन का 1820 तक इस्तेमाल किया गया था , उसके पश्चात फ्रांसीसी चाल्र्स जेवियर थॉमस डी कोलमार ( Charles Xavier Thomas De Colmar ) द्वारा यांत्रिक कैलकुलेटर शुरू । किए गए थे , जो की चार बुनियादी गणित कायों के प्रदर्शन करने में सक्षम था । यह arithometer के नाम से नामित किया ।गया था इसकी बहुमुखी प्रतिभा के साथ , arithrometer व्यापक रूप से प्रथम विश्व युद्ध तक इस्तेमाल किया गया था । कंप्यूटर की वास्तविक शुरुआत , जिसके बारे में आज हम जानते हैं , एक गणित के प्रोफेसर चार्ल्स बैबेज ( Charles Babbage ) के द्वारा की गयी थी । एक नई मशीन विकसित की गयी जो की विभेदक समीकरण ( differential equations ) को करने में सक्षम थी , और उसे Difference Engine का नाम दिया गया । यह मशीन भाप के द्वारा संचालित की गयी थी , जो आकार में काफी बड़ी थी और प्रोग्राम को स्टोर करने में तथा गणना करने के साथ ही परिणाम को मुद्रित ( प्रिंट ) करने में भी सक्षम थी | 10 वर्षों तक Difference Engine पर काम करने के बाद , बैबेज पहले सामान्य प्रयोजन कंप्यूटर पर काम करने के लिए प्रेरित हुए और उस मशीन को विश्लेषणात्मक इंजन ( Analytical Engine ) का नाम दिया । बैबेज के सहायक अगस्ता एडीए किंग ( Augusta Ada King ) ने मशीन के डिजाइन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी । इनके काम पर अमेरिका के रक्षा विभाग ने 1980 में उनके सम्मान में एक नयी प्रोग्रामिंग भाषा ADA नाम दिया था ।


--चार्ल्स बैबेज द्वारा डिजाइन किया गया विश्लेषणात्मक इंजन ( Analytical Engine ) आज के मानकों की तुलना में बहुत प्रारंभिक मशीन है | हालांकि , इसमें आधुनिक सामान्य प्रयोजन कंप्यूटर के बुनियादी तत्वों की चर्चा की गयी है । विश्लेषणात्मक इंजन 50 , 000 से अधिक घटकों से मिलकर बनाया गया था , बेसिक इनपुट डिजाइन पंच्ड कार्ड के रूप में बनाया गया था । इसके अंदर एक ' मिल ' एवं कंट्रोल इकाई भी होती है जो की निर्देशों को किसी भी क्रम में process कर आउटपुट मुद्रित परिणाम आउटपुट device पर देखे जाते थे ।

--वर्ष 1889 में , एक अमेरिकी आविष्कारक , हरमन होलेरिथ ( Herman Hollerith ) ने कंप्यूटिंग के लिए Jacquard हाथकरघा अवधारणा लागू की थी । वह अमेरिका की जनगणना की गणना करने के लिए एक तेजी से रास्ता खोज करना चाहते थे । होलेरिथ की विधि से कार्ड का इस्तेमाल कर डाटा को स्टोर किया जाता था और परिणामों को ज्ञात किया जाता था । होलेरिथ जो व्यापार की दनिया में पंच - कार्ड को लाए थे , जिससे आगे चल कर 1924 में आईबीएम ( IBM ) का उदय हुआ था अन्य कंपनियों ने भी बाजार में प्रवेश किया और व्यावसायिक उपयोग के लिए पंच रीडर का निर्माण किया , सरकारी और गैर - सरकारी दोनों कंपनियों ने वर्ष 1960 तक डेटा प्रोसेसिंग के लिए पंच कार्ड का इस्तेमाल किया । इसके अलावा , कई अन्य वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को कंप्यूटर के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की थी । वानेवर बुश ( Vannever Bush ) ने वर्ष 1930 में एक अंतर विश्लेषक नामक एक यंत्रवत् संचालित डिवाइस विकसित किया था | यह पहला बार सामान्य प्रयोजन के अनुरूप कंप्यूटर था । जॉन एटानासौफ और बेरी ने वर्ष 1939 में पहली बार इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल कंप्यूटिंग डिवाइस का निर्माण किया और अपनी पूरी डिजाइन को 1942 में पूरा किया था , यह कंप्यूटर इलेक्ट्रॉनिक्स के सिद्धांत पर और पर और ओन एवं ऑफ की अवधारणा पर तैयार किया गया था । द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान , कोलोसस द्वारा कोड ब्रेकर ( Code Breakers ) विकसित किया गया था , यह पहला इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल कंप्यूटर था । वर्ष 1946 में , प्रथम all - purpose इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल कंप्यूटर ENICAC ( इलेक्ट्रॉनिक अंक इंटीग्रेटर और कैलकुलेटर ) पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय में शुरू किया गया था । इस कंप्यूटर में हजारों की संख्या में वैक्यूमट्यूबों का इस्तेमाल किया गया था । यूनीवैक ( यूनिवर्सल स्वचालित कंप्यूटर ) यह कंप्यूटर सांख्यिक और वर्णमाला दोनों प्रकार डेटा को संभालने के लिए पहला कंप्यूटर था और साथ ही यह पहला वाणिज्यिक कंप्यूटर भी था ।
--वल्र्ड वाइड वेब 1990 में अनावरण किया गया था , इसके बाद आने । वाले वर्षों में कई नए ग्राफिकल वेब ब्राउज़र प्रोग्राम उपयोग में आने लगे , वेब और इंटरनेट के प्रसार एवं उपयोग ने सामान्य प्रयोजन ( जनरल पर्पस ) होम कंप्यूटिंग के विकास को गति दी । इसने और सोशल इंटरेक्शन को बढावा दिया । आजकल ऐसे स्मार्ट फोन की बहुत डिमांड है जो टच स्क्रीन हो , जिसमे मोबाइल कनेक्टिविटी हो एवं जिसमे बहुत सारी कंप्यूटर एप्लीकेशनरन करा सकते हो ।

कम्प्यूटर सिस्टम के लाभ -


*कंप्यूटर सिस्टम - परिभाषा -कंप्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है । कंप्यूटर ऐसे उपकरणों से बने होते हैं , जो डेटा को इनपुट करते है , प्रोसेस करते है एवं स्टोर करते है और इच्छित स्वरूप ( desired format ) में परिणाम देते है । डेटा का मतलब रॉ फैक्ट्स एंड फिगर्स है । डेटा एक इनपुट डिवाइस के माध्यम से , जैसे की कीबोर्ड , के माध्यम से कंप्यूटर में इनपुट किया जाता है और कंप्यूटर की मेमोरी में संग्रहीत किया जाता है । इसके बाद यह दिए गए निर्देशों के सेट के अनुसार कार्य ( प्रोसेस ) करता है । कंप्यूटर परिणाम को आउटपुट डिवाइस के माध्यम से , जैसे की मोनिटर , प्रदर्शित करता है । कंप्यूटर डेटा संसाधित ( प्रोसेस ) करता है और जानकारी का उत्पादन करता है । कंप्यूटर केवल विद्युत संकेतों जैसे की बंद और चालू को ही समझ सकते हैं जहाँ चालु का मतलब सर्किट ON है एवं बंद का मतलब सर्किट OFF है ( बाइनरी सिग्नल्स ) ,कंप्यूटर एक सूचना प्रणाली ( इनफार्मेशन सिस्टम ) का हिस्सा है ।

सूचना प्रणाली के पांच भाग है .
*  डेटा
*   हार्डवेयर
*   सॉफ्टवेयर 
*   प्रोसीजर
*    पीपल ( लोग )


  पीपल ( लोग ) : लोग सूचना प्रणाली के पांच भागों में से एक है । कंप्यूटर के द्वारा लोगों को अधिक उत्पादक और प्रभावी ( मोर प्रोडक्टिव एंडइफेक्टिव ) बनाया जा सकता है ।
    * प्रोसीजर : यह वे नियम या दिशा निर्देश है जोकि लोग सॉफ्टवेयर , हार्डवेयर एवं डाटा का उपयोग करते समय पालन करते है । इन प्रक्रियाओं को आमतौर पर कंप्यूटर विशेषज्ञों द्वारा लिखाव पुस्तिकाओं में दर्ज किया गया हैं । 


    * सॉफ्टवेयर : एक प्रोग्राम जो दिशा निर्देशों का सेट होता है और कंप्यूटर को बताता है की स्टेप बाय स्टेप कैसे कार्य करना है . प्रोग्राम या सेट ऑफ़ प्रोग्राम्स का दूसरा नाम सॉफ्टवेयर है ।


    *  हार्डवेयरः वह उपकरण जो डेटा को प्रोसेस कर सुचना में बदल देता है । इनमे कीबोर्ड , माउस , मॉनिटर , प्रणाली इकाई , और अन्य उपकरण शामिल हैं । हार्डवेयर सॉफ्टवेयर द्वारा नियंत्रित किया जाता है ।


    *   डेटा : कच्चे ( रॉ ) , असंसाधित तथ्यों , जैसे कि पाठ , संख्या , इमेज और ध्वनियों को डेटा कहा जाता है । प्रसंस्कृत ( प्रोसेस्ड ) डेटा से जानकारी अर्जित करते है ।
     
कंप्यूटर की विशेषताएं-


1 . गति ( स्पीड ) : कंप्यूटर बहुत ही उच्च गति पर डेटा को प्रोसेस करता है । कंप्यूटर डेटा की एक बड़ी मात्रा को । संसाधित ( प्रसिस ) करने के लिए केवल कुछ ही सेकंड लेता है अर्थात एक लाख निर्देशों को एक सेकण्ड में ही संसाधित किया जा सकता है ।
2 शुद्धता ( एक्यूरेसी ) : एक कंप्यूटर द्वारा उत्पादित परिणाम पूर्णरूप से सही होते हैं । यदि कंप्यूटर में सही डेटा दर्ज किया गया है तो प्राप्त परिणाम एकदम सटीक होगा । कंप्यूटर GIGO ( Garbage In Garbage Out ) के सिद्धांत काम करता है ।
3 उच्च संचयन क्षमता ( हाई स्टोरेज कैपेसिटी ) : कंप्यूटर की मेमोरी बहुत ही विशाल होती है , और एक बहुत ही कॉम्पैक्ट ढंग से डेटा को एक बड़ी मात्रा में स्टोर कर सकते हैं । कोई भी जानकारीया डेटा कंप्यूटर में एक लंबे समय तक के लिए स्टोर रहता है इस सुविधा के साथ , पुनरावृत्ति से बचा जा सकता है ।
4 विविधता : कंप्यूटर अनेक प्रकार के कार्यों को करने में उपयोग किया जा सकता है , जैसे की हम पत्र लिखने के लिए , पत्रक तैयार करने , संगीत सुनने , वस्तु सूची के प्रबन्धन , अस्पताल प्रबंधन , बैंकिंग और कई और प्रकार के कार्य कर सकते हैं ।
5 परिश्रमशीलता ( डिलिजेंस ) : एक मशीन होने के नाते , एक कंप्यूटर थकान , एकाग्रता की कमी और बोरियत से मुक्त होता है । कंप्यूटर जिस गति से पहले निर्देश को संसाधित करता है , उसी गति से आखरी निर्देश को संसाधित करने में सक्षम होता है ।

&सीमा ( लिमिटेशन ) : कम्प्यूटर एक मूक मशीन है और वह स्वयं कुछ नहीं कर सकता है । कंप्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन है । जोकि डाटा को ग्रहण करने की क्षमता रखता है एवं दिए हुए दिशा निर्देशों की पालना करते हुए इनफार्मेशन या सिग्नल के रूप आउटपुट देता है । एक अप्रत्याशित स्थिति में , कंप्यूटर अपने दम पर कोई भी निर्णय नहीं ले सकता है । निर्देशों के क्रम को कंप्यूटर से नहीं बदला जा सकता है । कम्प्यूटर का आईक्यू ( Intelligent Quotient ) नहीं होता है ।

हार्डवेयर (Hardware ) व सॉफ्टवेयर (Software)-
* सॉफ्टवेयर (software)- हम कंप्यूटर की मदद से विभिन्न प्रकार के कार्यों को संपन्न कर सकते है । असल में सभी प्रक्रियाएँ सॉफ्टवेयर की मदद से कि जाती है जो किसी एक सेकण्डरी मेमोरी डिवाइस में संग्रहित हो जाती है । सॉफ्टवेयर प्रोग्राम का एक और नाम है । सॉफ्टवेयर प्रोग्रामों का संग्रह है जो एक विशेष प्रयोजन ( स्पेशल पर्पस ) के लिए लिखा गया है । एक प्रोग्राम कुछ भी नहीं बस एक निर्देशों का समूह है जो की किसी एक विशेष प्रोग्रामिंग भाषा में लिखा गया है । सॉफ्टवेयर के दो प्रमुख प्रकार हैं : सिस्टम सॉफ्टवेयर और एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर । इन दोनों सॉफ्टवेयरों के अपने अपने कार्य क्षेत्र है ।


सिस्टम सॉफ्टवेयर (system software)-सिस्टम सॉफ्टवेयर एक ऐसा सॉफ्टवेयर है जो पहले उपयोगकर्ता स सूचना का आदान प्रदान करता है और फिर एप्लीकशन सॉफ्टवेयर के साथ काम करता है । सिस्टम सॉफ्टवेयर कंप्यूटर को अपने आंतरिक संसाधनों का प्रबंधन करने में मदद करता है । | | सिस्टम साफ्टवेर सिर्फ एक प्रोग्राम नहीं है , बल्कि कई प्राग्रामों का एक संग्रह है । सिस्टम प्रोग्राम्स के महत्वपूर्ण घटक निम्न प्रकार है -


1 . ऑपरेटिंग सिस्टम ( 0 . S . ) : ऑपरेटिंग सिस्टम सिस्टम सॉफ्टवेयर है जो की कंप्यूटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर संसाधनों ( सीपीयू , मेमोरी , इनपुट और आउटपुट आदि ) का प्रबंधन और कंप्यूटर प्रोग्राम के लिए आम सेवाएं प्रदान करता है । यह कंप्यूटर और उपयोगकर्ता ( यूजर ) के बीच एक इंटरफेस प्रदान करता है । विंडोज ओएस ( Windows OS ) कंप्यूटर पर सबसे अधिक और व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला ऑपरेटिंग सिस्टम में से एक है । लिनक्स और यूनिक्स ओएस भी कुछ विशेष प्रकार की एप्लीकेशन में इस्तेमाल किया जाता है । वे कई प्रकार के होते हैं , जैसे एम्बेडेड ( embedded ) , वितरित ( distributed ) , वास्तविक समय ( real time ) आदि ।
2 . यूटिलिटीज : यूटिलिटीज विभिन्न प्रकार की सेवाएँ हैं जो की ऑपरेटिंग सिस्टम के द्वारा प्रदान की जाती हैं । यूटिलिटीज जैसे डिस्क फ्रेग्मेंटर अवांछनीय फ़ाइल को हटाने एवं डिस्क के संसाधनों को पूर्ण रूप से काम में लेने के लिए उपयोगी होती हैं । इस सुविधा के द्वारा हम डिस्कस्पेस को भी व्यवस्थित कर सकते हैं ।
3. डिवाइस ड्राइवरः ये एक तरह के विशेष प्रोग्राम होते है जो अन्य इनपुट और आउटपुट डिवाइस को बाकी के कंप्यूटर प्रणाली के साथ संवाद ( कम्यूनिकेट ) करने की अनुमति प्रदान करते है ।
4. सर्वर : सर्वर की आवश्यकता तब पड़ती है जब अलग अलग यूजर द्वारा किये गये अनुरोधों को पूरा करने के लिए विभिन्न प्रकार के प्रोग्राम करन करने की जरुरत होती है।

एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर (application software)--एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर वो सॉफ्टवेयर है जो विशेष रूप से उपयोगकर्ताओं ( यूजर ) के लिए तैयार किये जाते हैं इनको एंड यूजर प्रोग्राम्स भी कहते हैं । कुछ प्रोग्राम्स जैसे वर्डप्रोसेसर , वेब ब्राउज़र , एक्सेल एप्लीकेशन सॉफ्टवेर की श्रेणी में आते है इन । प्रोग्रामों को बेसिक या स्पेशलाइज्ड एप्लीकेशन के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है ।
बेसिक एप्लीकेशनः (basic application)- इन एप्लिकेशन को व्यापक रूप से जीवन के लगभग सभी क्षेत्रों में उपयोग किया जाता  है:-

1 . व्यापार
2 . शिक्षा
3 . चिकित्सा विज्ञान
4 . बैंकिंग
5 . इंडस्ट्रीज

एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर का उपयोग आप अनेक कामों के लिये कर सकते है जैसे संदेश भेजने , दस्तावेज़ तैयार करने , स्प्रेडशीट बनाना , डेटाबेस , ऑनलाइन शॉपिंग आदि । एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर इस तरीके से तैयार किये जाते है जिससे उपयोगकर्ता के लिये काम करना लिए बेहद आसान हो जाता है ।
उदाहरण:- के लिए यदि कोई उपयोगकर्ता किसी भी वर्ड ( MS Word फाइल को बनाता तो उसे margin line spacing , font साइज़ पहले से ही सेट मिलता है जिसे वो अपने अनुसार चेंज कर सकता है । उपयोगकर्ता ( यूज ) डॉक्यूमेंट में रंग भरने , शीर्षकों , और तस्वीरें आवश्यकता अनुसार जोड़ सकते हैं ।
 उदाहरण : - एक वेब ब्राउज़र एक एप्लीकेशन सॉफ्टवेर ही जिसे विशेष रूप से इंटरनेट पर पाई जाने वाली इनफार्मेशन एवं कंटेंटखोजने के लिए तैयार किया गया है । 

वेब ब्राउज़र के नाम (web browser):- इंटरनेट एक्सप्लोरर ( Internet Explorer ) , मोज़िला फायरफोक्स ( Mozilla Firefox ) , गूगल । क्रोम ( Google Chrome ) एवं सफारी ( Safari )।

 स्पेशलाइज्ड एप्लीकेशन:- में हजारों अन्य प्रोग्राम है जोकि विशिष्ट विषयों और व्यवसायों पर ध्यान केंद्रित करते है । कुछ सबसे अच्छे प्रोग्राम्स है - ग्राफिक्स , ऑडियो , वीडियो , मल्टीमीडिया , वेब लेखन , और कृत्रिम बुद्धि ( artificial intelligence )।


हार्डवेयर हार्डवेयर: - एक सामान्य शब्द है जोकि कंप्यूटर प्रणाली के किसी भी घटक ( कंपोनेंट ) की भौतिक उपस्थिति का वर्णन करने के लिए किया जाता है तथा जिसे देखा और छुआ जा सके । इसमें कंप्यूटर केस , मॉनीटर कीबोर्ड और माउस भी शामिल है । इस तरह से कीबोर्ड , माउस , मॉनिटर , प्रिंटर , मदरबोर्ड , मेमोरी चिप्स , इलेक्ट्रॉनिक सर्किट , एक्सपेंशन कार्ड , केबल , स्विच और जिसे आप छूकर और महसूस कर सकते है वे उपकरण हार्डवेयर में शामिल हैं ।
* हार्डवेयर components को अक्सर इनपुट , आउटपुट , स्टोरेजया प्रोसेसिंग components के रूप में वर्गीकृत कर सकते हैं । हार्डवेयर components जो सीपीयू ( CPU ) का एक अभिन्न हिस्सा नहीं हैं उन्हें पेरिफेरल उपकरणों ( peripheral devices ) के रूप में संदर्भित किया जाता है , पेरिफेरल उपकरणों को आमतौर पर इनपुट , स्टोरेज या आउटपुट ( जैसे हार्ड डिस्क , कीबोर्ड या प्रिंटर ) के लिए उपयोग किया जाता है ।
*  इनपुट डिवाइस एक ऐसी हार्डवेयर डिवाइस है यूजर से इनफार्मेशन स्वीकार करती है , इनफार्मेशन को इलेक्ट्रिकल सिमल में । कन्वर्ट करती है और उसके बाद प्रोसेसर को संचारित ( ट्रांसमिट ) करती है । इनपुट डिवाइस का मुख्य कार्य मनुष्य ( Humans )को कंप्यूटर के साथ इंटरेक्शन करवाना होता है । उदाहरण के लिए अगर आप कंप्यूटर पर गेम खेल रहे हो तो माउस पॉइंट ( यूजर इंटरफेस के डिजाइन में एक आम तत्व ) के द्वारा आप नेविगेशन कण्ट्रोल कर सकते है ।
*  आउटपुट डिवाइस कंप्यूटर सिस्टम से इनफार्मेशन लेता और ऐसी रूप में परिवर्तित करता है जिसको मनुष्यों ( Humans ) द्वारा आसानी से समझा जा सकता है । उदाहरण लिए मॉनिटर यूजर के लिए प्रोसेसर के द्वारा प्रोसेस की गयी इनफार्मेशन को विसुअल डिस्प्ले के द्वारा दिखाता है ।
*   प्रोसेसिंग डिवाइस कंप्यूटर के भीतर इनफार्मेशन की प्रोसेसिंग के लिए जिम्मेदार कंपोनेंट हैं । इनमे सीपीयू मेमोरी और मदरबोर्ड डिवाइस शामिल हैं ।
*    स्टोरेज डिवाइस एक ऐसा कंपोनेंट हैं जो कंप्यूटर के भीतर डेटा संग्रहीत करने की अनुमति प्रदान करता है । इनमें हार्ड डिस्क ड्राइव और कॉम्पैक्ट डिस्क ड्राइव शामिल हैं ।

घटक     :- उदाहरण
1 . इनपुट (input):- ट्रैकबॉल , टच पैड , माइक्रोफोन , कीबोर्ड , सेंसर , माउस , जोस्टिक , स्केनर , वेब केमरा ।
2 . प्रोसेसिंग (processing) :- स्टोरेज मदरबोर्ड , प्रोसेसरासीपीयू ) , मेमोरी
3 . आउटपुट (output):- मॉनिटर , प्रिंटर , हैडफ़ोन , स्पीकर , टचस्क्रीन , प्रोजेक्टर इत्यादि ।
4 . स्टोरेज (storage):- हार्ड डिस्क ड्राइव।

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